चमन लाल महाविद्यालय में राष्ट्रीय कार्यशाला के अंतिम दिन शैक्षणिक भ्रमण आयोजित किया गया।

चमन लाल महाविद्यालय, लंढौरा में ICPR द्वारा आयोजित त्रिदिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आधुनिक विज्ञान परिप्रेक्ष्य में भारतीय ज्ञान प्रणाली का पुनरीक्षण दिनांक 13-15 मार्च को आयोजित किया गया। कार्यशाला के अंतिम दिन को सभी प्रतिभागियों को शैक्षणिक भ्रमण के लिए देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार एवं पतंजलि शोध संस्थान की ओर रवाना किया गया। सभी प्रतिभागियों ने वहां पर निर्मित स्वालंबन केंद्र हस्तशिल्प कला केंद्र हथकरघा केंद्र एवं अन्य हस्त निर्मित चीजों का अवलोकन किया एवं उनसे कौशल प्रशिक्षण केंद्र के विषय में संपूर्ण जानकारी से अवगत कराया गया तथा देव संस्कृति विश्वविद्यालय के गणित विभाग से डॉ. आरती वर्मा एवं उनकी पूरी टीम ने हम सब का मार्गदर्शन किया। प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र एवं वन औषधियों का भी हमारी टीम ने निरीक्षण किया अनेक आयुर्वेदिक औषधियों के विषय में भी प्रशिक्षण दिया जिससे हम सदैव निरोग रह सकते हैं। शांतिकुंज आचार्य ने गौशाला मैं किस प्रकार गोबर गैस संयंत्र का निर्माण किया गया एवं किस प्रकार गाय की नस्ल को सुरक्षित किया जा सकता है एवं इसका संवर्धन मानव जाति के लिए कितना अति आवश्यक है इस विषय पर भी हमें जानकारी से अवगत कराया तत्पश्चात हमारी संपूर्ण टीम ने गणित विभाग का शैक्षणिक भ्रमण किया वहां के छात्र-छात्राओं ने हमारा स्वागत और अभिनंदन किया तथा भेंट स्वरूप पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के साहित्य पर आधारित एक पुस्तक भेंट स्वरूप भेंट की गई। हमने वहां पर जलपान ग्रहण किया तथा उसके बाद हम पतंजलि शोध संस्थान की ओर रवाना हो गए। पतंजलि शोध संस्थान एवं पतंजलि उद्यान में अनेक औषधीय पौधों की हमने निरीक्षण किया और हिमालय की दुर्लभ प्रजाति की औषधियों का भी हमने अवलोकन किया जिसमें देखा गया है कि किस प्रकार इन औषधियों के माध्यम से हम निरोग रह सकते हैंl प्रकृति चित्रण के माध्यम से अनेक मुद्राएं ऋषि-मुनियों द्वारा शल्य चिकित्सा रोग मुक्ति हेतु उपचार एवं किस प्रकार औषधियों का हम निर्माण करते थे किस प्रकार हम नारी विज्ञान की सहायता से हम किस प्रकार संदेश किस्सा किया करते थे उसको भी हमने चित्रण के माध्यम से जाना। शरीर में वात पित्त कफ व अन्य रस किस प्रकार शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं इस विषय में भी हमने विस्तृत रूप से जाना। जल नीति, सूत्र नेति एवं वस्त्र धोती एवं वमन धोती आदि के माध्यम से हमने जाना कि किस प्रकार हम अपने रोगों का उपचार कर सकते हैं। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. ऋचा चौहान व आयोजन सचिव डॉ. तरुण कुमार गुप्ता ने सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया इस अवसर पर डॉ. सूर्यकांत शर्मा डॉ. विमल कांत तिवारी डॉ. किरण शर्मा , डॉ. नीतू गुप्ता , डॉ. श्वेता आदि शिक्षक गण उपस्थित रहे।
