
जून के व्रत त्योहार, निर्जला एकादशी-प्रदोष व्रत समेत अन्य त्योहार कब हैं? जानिए तिथि और महत्व:आचार्य सुशील जोशी।
जून में कई व्रत और त्योहार आने वाले हैं। इस महीने गंगा दशहरा से लेकर जगन्नाथ रथ यात्रा तक कई व्रत और त्योहार आएंगे। इस महीने निर्जला और योगिनी एकादशी मनाई जाएगी। इसके साथ ही जून में संकष्टी चतुर्थी, ज्येष्ठ पूर्णिमा और आषाढ़ अमावस्या कब मनाई जाएगी। आइये विस्तार से जानते हैं।
साल 2025 का जून महीना रविवार के दिन से शुरू हो रहा है और पंचांग के अनुसार 1 जून को ज्येष्ठ शुक्ल षष्ठी तिथि है और इस दिन स्कंद षष्ठी भी है। और यह महीना आश्लेषा नक्षत्र में शुरू होगा और इस महीने कई त्योहार और ग्रह गोचर होने वाले हैं। इस महीने गंगा दशहरा, निर्जला एकादशी, वट सावित्री पूर्णिमा समेत अन्य अहम त्योहार मनाए जाएंगे। इसके साथ ही जून में बुध, मंगल और सूर्य का गोचर भी होने वाला है। और महीने के अंत में जगन्नाथ रथ यात्रा निकलेगी। ऐसे में यह महीना कई व्रत और त्योहारों वाला है। ऐसे में आइये जानते हैं जून में एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या समेत कौन कौन से व्रत त्योहार आने वाले हैं।
गंगा दशहरा का पर्व 5 जून गुरुवार को मनाया जाएगा। गंगा दशहरा ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर मनाया जाता है। गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान करने, दान पुण्य करने का बड़ा महत्व है। इस दिन गंगा स्नान करने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है।
निर्जला एकादशी का व्रत 6 जून शुक्रवार को रखा जाएगा। निर्जला एकादशी श्रेष्ठ मानी जाती है और मान्यता है कि इसका व्रत रखने से सभी एकादशी के बराबर फल मिलता है। इस दिन निर्जल व्रत रखा जाता है। निर्जला एकादशी का पारण 7 जून को होगा।
ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि यानी 8 जून को प्रदोष व्रत रखा जाएगा। इस दिन रविवार होने की वजह से इसे रवि प्रदोष व्रत के तौर पर मनाया जाएगा। इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा अर्चना होती है। इसके साथ ही रवि प्रदोष व्रत पितृ शांति के लिए भी अहम माना जाता है।
वट सावित्री पूर्णिमा व्रत 10 जून को रखा जाएगा। वट सावित्री पूर्णिमा व्रत पति की लंबी आयु के लिए रखा जाता है। मुख्यतः वट सावित्री पूर्णिमा व्रत दक्षिण भारत के राज्यों, महाराष्ट्र और गुजरात में रखा जाता है। जबकि उत्तर भारत के अधिकतर राज्यों में वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ अमावस्या के दिन रखा जाता है।
ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत 11 जून को रखा जाएगा। ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि 10 जून को सुबह 11.35 बजे से 11 जून की दोपहर 1.13 बजे तक रहेगी। ज्येष्ठ पूर्णिमा का व्रत संतान के लिए रखा जाता है। इसके साथ ही ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन यानी 11 जून को चंद्रोदय 7.41 बजे होगा। इस दिन संत कबीर जयंती भी है। इसे संत कबीर के जन्मदिवस के तौर पर मनाया जाता है।
योगिनी एकादशी का व्रत 21 जून यानी शनिवार को रखा जाएगा। योगिनी एकादशी को लेकर मान्यता है कि इसका व्रत रखने वालों के सभी पाप दूर हो जाते हैं और 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर लाभ मिलता है। इसके साथ ही इसे तीनों लोकों में मनाया जाता है।
मासिक शिवरात्रि और सोम प्रदोष व्रत 23 जून को रखा जाएगा। सोमवार के दिन त्रयोदशी तिथि आती है तो उस दिन के प्रदोष व्रत को सोम प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। सोम प्रदोष व्रत का पूजा मुहूर्त 23 जून को शाम 7.22 से 9.23 बजे तक है।
आषाढ़ अमावस्या 25 जून को है। आषाढ़ कृष्ण अमावस्या तिथि पितरों के पूजन के लिए अहम मानी जाती है। इसके साथ ही इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने, दान और पुण्य कर्म करने का बड़ा महत्व रहता है।
गुप्त नवरात्र 26 जून से शुरू हो रहे हैं। इसी दिन सुबह 5.25 बजे से 6.58 बजे के बीच घट स्थापना की जाएगी। इसके साथ ही अलग-अलग तरह के अनुष्ठान इस दिन किए जाते हैं। मां दुर्गा का पूजन होता है। गुप्त नवरात्र में शारदीय नवरात्र की तरह पूजन और अनुष्ठान किए जाते हैं।
भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा 27 जून को शुरू होगी। इसे ओडिशा राज्य में धूमधाम से मनाया जाता है। जगन्नाथ पुरी में रथ यात्रा उत्सव मनाया जाता है और भगवान जगन्नाथ के साथ-साथ उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की भी इस दौरान पूजा की जाती है।
3 जून दुर्गाष्टमी व्रत।
5 जून गंगा दशहरा।
6 जून निर्जला एकादशी व्रत।
8 जून रवि प्रदोष व्रत।
10 जून व्रत पूर्णिमा।
11 जून ज्येष्ठ स्नान,दान,पूर्णिमा।
14 जून गणेश चतुर्थी व्रत।
15 जून संक्रांति।
22 जून योगनी एकादशी व्रत।
23 जुन मासशिवरात्री।
25 जून देवपित्र अमावस्या।
26 जून गुप्त नवरात्रि पर्व।
27 जून मनोरथ द्वितिया व्रत।
28 जून विनायक चतुर्थी व्रत।
30 जून स्कंद षष्टि व्रत।