चमन लाल महाविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

चमन लाल महाविद्यालय लंढौरा में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आचार्य विनोबा भावे के दर्शन की आधुनिक भारतीय समाज में प्रासंगिकता विषय पर आयोजन के द्वितीय दिवस का प्रथम सत्र का आयोजन आज दिनांक 11:03 2022 को प्रातः 9:30 के महाविद्यालय के सेमीनार हाल में प्रारंभ हुआ। सेमिनार के द्वितीय दिवस की विधिवत शुरुआत ज्ञान की देवी मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करके एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया ।तत्पश्चात महाविद्यालय के छात्र/छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई।मंच संचालन करते हुए डॉ.नवीन त्यागी ने सभी सम्मानित अतिथियों को मंच पर आमंत्रित किया।सेमिनार के आज अंतिम दिवस में मुख्य अतिथि के रुप में चमन लाल महाविद्यालय के प्रबंध समिति के अध्यक्ष पंडित राम कुमार शर्मा जी,मुख्य वक्ता के तौर पर डॉक्टर बबलू वेदालंकार,असिस्टेंट प्रोफेसर,दर्शनशास्त्र विभाग,गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार और विशिष्ट अतिथि के रूप में चमन लाल महाविद्यालय के प्रबंध समिति के सचिव पंडित अरुण हरित जी और विषय विशेषज्ञ के रूप में डॉ अनुराग शर्मा,असिस्टेंट प्रोफेसर,वाणिज्य विभाग,राजकीय महाविद्यालय कोटद्वार भाबर तथा डॉ गिरिराज सिंह,राजकीय महाविद्यालय मरगूबपुर और डॉ तीर्थ प्रकाश,एसोसिएट प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान विभाग,राजकीय महाविद्यालय मंगलौर,हरिद्वार ने अपनी गरिमामय उपस्थिति दर्ज की। सेमीनार के आयोजक एवं महाविद्यालय के प्राचार्य द्वारा आमंत्रित अतिथियों का स्वागत किया गया।स्वागत कार्यक्रम के पश्चात डॉ निशु कुमार भाटी असिस्टेंट प्रोफेसर,राजनीति विज्ञान विभाग, के द्वारा सेमिनार के प्रथम दिवस में हुए आयोजन एवं वक्ताओं का सारांश प्रस्तुत करने के साथ-साथ सेमिनार की स्पष्ट रूपरेखा भी प्रस्तुत की ।सेमिनार में विशेष वक्ता के रूप में डॉक्टर बबलू वेदालंकर ने अपने उद्बोधन की शुरुआत की। उन्होंने अपने वक्तव्य के प्रारंभ में सभी अतिथियों का अभिवादन करते हुए आचार्य विनोबा भावे के विचारों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि संत विनोबा भावे का दर्शन तर्क ,वैज्ञानिकता एवं तपस्वी जीवन की अनुभूतियों का परिणाम है। वे एक ऐसे आदर्श समाज की परिकल्पना प्रस्तुत करते हैं जिसका आधार प्रेम, संयम,अनुशासन तथा भावपूर्ण भावना से अभिभूत है जिसके द्वारा एक सुंदर परिवार एवं आदर्श समाज की स्थापना की जा सकती है ।अनेक प्रकार की समस्याएं जैसे परिवार का विघटन,सामाजिक हिंसा को दूर किया जा सकता है।बबलू ने स्पष्ट किया कि समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने के लिए मोदी का समाज के प्रति संवेदनशील राज्य की अवधारणा को साकार करने हेतु ग्रामीण परिवारों की जागरूक करने के अभियान चलाने की आवश्यकता है जिससे की वर्तमान समस्याओं को दूर किया जा सकता है वहीं दूसरे ने अपने उद्बोधन में कहा कि आचार्य के आर्थिक विचारों पर प्रकाश डालते हुए उनके भूदान आंदोलन का महत्व एवं आर्थिक क्षमता को प्रभावित करने का आधार बताया।डॉक्टर ने बताया कि भारत की प्रारंभिक अवस्था में भारत के ग्रामों में रहने वाले दरिद्र जन की दुर्दशा मुख्य कारण भूमि पर भारी दबाव था इसलिए उनसे भूमि को मुक्त करा कर के ग्रामीणों को स्वावलंबी बनाना एवं आत्मनिर्भरता का बोध कराना अति आवश्यक हो गया था ।इसलिए आचार्य विनोबा भावे ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को एक संबल प्रदान करने हेतु भूदान आंदोलन की शुरुआत की जिसके माध्यम से शोषक और जमीदार वर्ग से जमीन दान करा कर आर्थिक रूप से कमजोर ग्रामीणों को प्रदान की गई। इसी प्रकार आचार्य विनोबा भावे का दर्शन वर्तमान सर्वोदय समाज एवं सर्वजन हिताय की परिकल्पना का पोषक माना जा सकता है दोनों वक्ताओं के विचारों के पश्चात सेमिनार के प्रथम सत्र दिवस का समापन करते हुए सभी आमंत्रित अतिथियों को स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया प्रथम सत्र के समापन पर पंडित श्री राम कुमार शर्मा जी द्वारा सभी अतिथियों को आशीर्वाद दिया।

