बांग्लादेश उन देशों में से है जो जलवायु आपदाओं के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं. लेकिन स्थानीय समुदायों, खासकर महिलाओं को जलवायु संबंधी समस्याओं के प्रभावों को दूर करने में मदद के लिए कई तरह की कोशिशें की गई हैं.गीता मोनी मंडल अपने घर में दिन में कई घंटे बिताती है जहां वो इस सर्दी में कई तरह की सब्जियों की खेती कर रही हैं. एक दिहाड़ी मजदूर की पत्नी और दो बच्चों की मां मंडल ने दो साल पहले अपने पति की आमदनी में आई कमी के बाद अपने यार्ड में सब्जियां उगाना शुरू कर दिया था|
वो कहती हैं, “अत्यधिक बाढ़ और जलभराव ने कई खेत मालिकों को कृषि उत्पादन छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया. मेरे पति जैसे दिहाड़ी मजदूरों के लिए नियमित काम मिलना मुश्किल था. मैं अब सब्जियां बेचकर अपने परिवार और अपने बच्चों की पढ़ाई लिखाई का इंतजाम कर रही हूं.” मंडल इस क्षेत्र में अकेली ऐसी महिला नहीं हैं बल्कि बांग्लादेश के तटीय क्षेत्रों में रहने वाली कई महिलाओं की ऐसी ही कहानियां हैं, जहां जलवायु परिवर्तन से जुड़ी मौसमी अति की घटनाएं नियमित रूप से स्थानीय समुदायों में दुख का कारण बनती हैं. जलवायु परिवर्तन के प्रति बेहद संवेदनशील बांग्लादेश उन देशों में से एक है जो जलवायु आपदाओं के प्रति सबसे ज्यादा संवेदनशील हैं|
देश में लगातार बाढ़, सूखा, नदी के किनारे का कटाव, तटीय कटाव और बंगाल की खाड़ी में बनने वाले चक्रवातों का सामना करना पड़ता है. देश का दक्षिणी तटीय भाग, जहाँ करीब तीन करोड़ लोग रहते हैं, वह इलाका अक्सर जलवायु से संबंधित प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित होता है और लाखों लोगों को वहां से विस्थापित होना पड़ता है.
