सरकार और जीवाश्म ईंधन कंपनियां लंबे समय से यह बात कह रही हैं कि प्राकृतिक गैस स्वच्छ ऊर्जा वाले भविष्य में जाने का ‘ब्रिज’ है. लेकिन सवाल यह है कि क्या गैस वाकई में स्वच्छ ऊर्जा का स्रोत है?हम खाना पकाने के लिए लंबे समय से गैस का इस्तेमाल कर रहे हैं. साथ ही, इसके इस्तेमाल से हम घरों को गर्म भी कर रहे हैं. बिजली के उत्पादन के लिए भी इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है. उदाहरण के लिए, अमेरिका में 2020 में कुल ऊर्जा की खपत में 34 फीसदी हिस्सेदारी प्राकृतिक गैस की थी|
यह बिजली उत्पादन का भी प्रमुख स्रोत था. हाल के समय में जिस तरह से कोयले से चलने वाले बिजली घरों को चरणबद्ध तरीके से बंद किया जा रहा है उस स्थिति में जीवाश्म गैस तीन अक्षर (GAS) वाले जलवायु हीरो के तौर पर तेजी से उभर रहा है. लेकिन क्या यह वाकई में जलवायु हीरो है? जवाब है, नहीं. यह जलवायु हीरो नहीं है. यूरोपीय आयोग ने पिछले हफ्ते प्राकृतिक गैस और परमाणु ऊर्जा को ‘जलवायु के अनुकूल स्वच्छ ईंधन’ के तौर पर वर्गीकृत करने का प्रस्ताव दिया था. इस प्रस्ताव का मकसद गैस से पैदा होने वाली ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देना है. प्रस्ताव के समर्थकों का कहना है कि गैस कोयले जैसे अन्य विकल्पों की तुलना में काफी ‘स्वच्छ’ है. परमाणु ऊर्जा से भी जीरो कार्बन उत्सर्जन होता है|
वहीं, आलोचकों का कहना है कि यह प्रस्ताव सिर्फ दिखने में जलवायु के अनुकूल लगता है, लेकिन हकीकत में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का प्रयास है. आलोचकों ने परमाणु ऊर्जा को भी टिकाऊ बताने की बात को ‘गलत’ बताया और कहा कि इससे निकलने वाले कचरे लंबे समय तक पर्यावरण को प्रभावित करते हैं. यह सच बात है कि बिजली के उत्पादन में गैस का इस्तेमाल करने पर कोयले की तुलना में 50 फीसदी कम कार्बन उत्सर्जन होता है.
