हिंदुस्तान समाचार पत्र के पत्रकार सती को धकियाने वाला इंस्पेक्टर अरोड़ा सस्पेंड। मुख्यमंत्री व डीजीपी ने दिए जांच के निर्देश।



वर्दी की ऐंठ व जुबान के तल्ख़ बोलों ने आखिर सब इंस्पेक्टर हर्ष अरोड़ा को ज़मीन पर ला ही दिया। विगत दो दिन पूर्व मांगलवार को दशहरा मेले की कवरेज के लिए गए हिन्दुस्तान के वरिष्ठ पत्रकार ओम प्रकाश सती के साथ दरोगा हर्ष अरोड़ा सार्वजानिक रूप से की गई अभद्रता उन्हें महंगी पड़ी। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडिओ को देख जहाँ आम जनता ने इंस्पेक्टर के रवैय्ये की भर्त्सना की वहीं प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया के पत्रकारों में इस घटना से आक्रोश दिखा व इस मामले को लेकर पत्रकारों ने बुधवार को डीजीपी से मुलाकात कर कड़ा आक्रोश जताया। पत्रकार ओम सती की लिखित शिकायत पर जहाँ एक ओर डीजीपी अशोक कुमार ने दरोगा हर्ष अरोड़ा को सस्पेंड करने के अलावा उसके खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए डीजीपी को उचित कार्रवाई के निर्देश दिए। एसएसपी अजय सिंह ने दरोगा हर्ष अरोड़ा को विगत बुधवार शाम सस्पेंड कर दिया।
दैनिक हिंदुस्तान समाचार पत्र के वरिष्ठ पत्रकार ओम सती की लिखित शिकायत के साथ पत्रकारों ने डीजीपी अशोक कुमार से मुलाकात कर समस्त प्रकरण की जानकारी साझा करते हुए कहा कि “परेड ग्राउंड में मंगलवार को रावण दहन का आयोजन था। कवरेज के लिए वरिष्ठ पत्रकार ओम प्रकाश सती भी वहां मौजूद थे। पत्रकारों को पुलिस ने एक स्थान पर कवरेज के लिए बैठने का आग्रह किया। वहां तक अचानक आम लोग भी पहुंच गए। इस पर ड्यूटी पर तैनात दरोगा हर्ष अरोड़ा आए और ओम प्रकाश सती से अभद्रता करने लगे। वर्दी का रौब गांठते हुए वह ओम सती को अपमानजनकत तरीके से आयोजन स्थल से बाहर धकेलते हुए ले गए। उन्होंने सैकड़ों लोगों की भीड़ के बीच पत्रकार के सम्मान को गहरा आघात पहुंचाया। पत्रकारों ने कहा, यह मानवाधिकार का भी उल्लंघन है। ऐसा किसी भी नागरिक के साथ नहीं किया जा सकता, जबकि ओम प्रकाश सती वहां कवरेज के लिए बाकायदा ड्यूटी पर थे।”
दरोगा हर्ष अरोड़ा की इस हरकत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विभिन्न पत्रकार संगठनों ने इस प्रकरण की कड़ी आलोचना की है। प्रेस क्लब ऑफ मसूरी पूर्व अध्यक्ष प्रदीप भंडारी ने ट्वीट करते हुए अपने सोशल पेज पर लिखा है कि – “विजयदशमी के अवसर पर कल देहरादून में वरिष्ठ पत्रकार ओम सती के साथ पुलिस सब इंस्पेक्टर द्वारा की गई बदसलूकी की मैं कड़े शब्दों में निंदा करता हूं। और प्रदेश डी जी पी से इस असंवैधानिक कुकृत्य के लिए दोषी पुलिस अधिकारी के निलबन की मांग करता हूं।”
वहीं नेशनल सोशल मीडिया जर्नलिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज इष्टवाल ने इस घटनाक्रम पर आश्चर्य जताते हुए अपने सोशल पेज पर ट्वीट करते हुए वायरल वीडिओ शेयर करते हुए लिखा है कि:-
“लोक तंत्र के चौथे स्तम्भ के प्रति पुलिसिया यह रवैया क्या शोभनीय है? पत्रकारों का वर्दी के प्रति सम्मान हमेशा ही बना रहा लेकिन यह घटना हमें शर्मसार करती नजर आती है। मैं नहीं जानता कि हिंदुस्तान समाचार पत्र के पत्रकार ओम प्रकाश सती की क्या गलती रही होगी जो दरोगा इतने आग बबूला होते नजर आये। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि सती जी की कोई गलती नहीं थी। उन्होंने तो परिचय भी दिया कि मैं पत्रकार हूँ लेकिन दरोगा साहिब वर्दी की हनक में वो करते रहे जो यकीनन क़ानून सम्मत भी नहीं लगता व पुलिस आचरण नियमावली में भी कहीं वर्णित नहीं होगा।
बेचारे हनुमान जी भी इस प्रकरण में असहाय नजर आये। मुझे लगता है कि उक्त घटना का संज्ञान सिर्फ़ पत्रकारों ने ही नहीं लिया होगा बल्कि एसएसपी देहरादून व डीजीपी साहब ने भी लिया होगा।”
ऐसे ही जाने कितने पत्रकार व पत्रकार संगठनों ने इस खबर पर सब इंस्पेक्टर हर्ष अरोड़ा के कृत्य की कड़ी आलोचना की है। वरिष्ठ पत्रकार गुनानंद जखमोला ने तो इस प्रकरण पर बेहद तल्ख़ तेवरों के साथ अपनी खीझ उतारते हुए अपनी सोशल साइट पर लिखा है कि
“अखबारी लाला और संपादक दोनों नंबर एक दब्बू और डरपोक होते हैं।
वरिष्ठ पत्रकार गजेंद्र रावत ने जी न्यूज़ के पूर्व वीडिओ जर्नलिस्ट गोविन्द सिंह का मामला ताजा करते हुए लिखा कि:-
मीडिया मालिकों के धंधे के लिए खोले मीडिया हाउस में पत्रकार मालिक के धंधे को बढ़ाने के कारण पिस रहे हैं…. पत्रकारों के भविष्य से खेलते धंधेबाज मालिक पत्रकारों की उस मजबूरी का जमकर दोहन कर रहे हैं जिसमे वो नौकरी कर रहा है .. ताजा मामला उत्तराखंड से प्रकाशित होने वाले अखबार हिंदुस्तान के पत्रकार ओम प्रकाश सती को देहरादून पुलिस द्वारा धक्के मारकर खदेड़ने का है। कुछ साल पहले जी न्यूज के छोटे भाई गोविंद का उत्तराखंड पुलिस गला पकड़कर घसीट रही थी तो गोविंद गला छुड़ाने की बजाय कैमरा बचा रहा था क्योंकि कैमरा टूटता तो नौकरी चली जाती.. जी न्यूज वालों ने गोविंद के लिए एक शब्द नही बोला ..
पत्रकारिता के इस गुलाम काल में धंधेबाज मालिकों को बेनकाब करना बेहद जरूरी है जिनके कारण आज ये सब दिख रहा है।”
पत्रकारों का यह रोष यकीनन उनके संस्थानों द्वारा किये जा रही अवहेलना के बाद पनपना कहीं न कहीं जायज है। शुक्र है कि दैनिक हिन्दुस्तान समाचार पत्र ने आखिरकार आज के अपने अखबार में इस प्रकरण पर दो कालम की खबर छापी है।
बहरहाल पत्रकारों से हुई मुलाक़ात के बाद डीजीपी अशोक कुमार ने पत्रकारों को दो घंटे के भीतर कार्रवाई का आश्वासन दिया था। जो दो घंटे न सही लेकिन कुछ घंटों में प्रभावी होता दिखाई दिया और दरोगा हर्ष अरोड़ा सस्पेंड किया गया।आरोपी दरोगा के खिलाफ जांच सीओ डालनवाला को सौंपी गई है। उनसे तीन दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी है। इससे पहले एसएसपी अजय सिंह ने बुधवार सुबह ही खुद संज्ञान लेकर आरोपी दरोगा को लाइन हाजिर कर दिया था।
